वाहन बीमा के प्रकार – थर्ड पार्टी और कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी क्या है | पूरी जानकारी

वाहन बीमा के प्रकार – भारतीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार किसी भी सार्वजनिक सड़क पर बिना बीमा के वाहन चलाना एक दण्डनीय अपराध हैं और कानूनी रूप से किसी भी सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाने के लिए कम से कम थर्ड पार्टी बीमा कराना अनिवार्य है

अगर आप अपने वाहन का बीमा करा लेते हैं और किसी कारण से उसका एक्सीडेंट हो जाता है तो इस दुर्घटना में हुए नुकसान का पूरा खर्च बीमा कंपनी उठाती है लेकिन क्या बीमा कंपनी सिर्फ दूसरे व्यक्ति और उसके वाहन के क्षतिग्रस्त होने का खर्च ही उठाएगी या फिर इसके साथ आपके क्षतिग्रस्त वाहन का खर्च भी उठाएगी

तो देखिए यह बात आपके वाहन बीमा के प्रकार पर निर्भर करती है कि आपने कोनसा बीमा कराया हुआ है

तो चलिए वाहन बीमा कितने प्रकार का होता है और बीमा कंपनी सिर्फ थर्ड पार्टी का खर्च कब उठाती है ? आपके वाहन का खर्च कब उठाती है ? और दोनों पक्षों के नुकसान का खर्च कब उठाती है ? ये सारी बातें डिटेल से समझते हैं

फुल आर्टिकल एक नजर में

वाहन बीमा के प्रकार – Types of Vehicle Insurance

वाहन बीमा के प्रकार

वाहन बीमा कितने प्रकार का होता है – इसे हम दो भागों में बांट सकते हैं

  1. बीमा कंपनी के खर्चा उठाने के आधार पर और
  2. वाहन के प्रकार के आधार पर

पहले हम वाहन दुर्घटना में बीमा कंपनी के खर्चा उठाने के आधार पर वाहन बीमा के प्रकार को समझते हैं इस आधार पर वाहन बीमा चार प्रकार के होते हैं

# 1. थर्ड पार्टी या तृतीय पक्ष बीमा – Third Party Insurance

भारतीय वाहन अधिनियम एवं दिशानिर्देशों के अनुसार सभी प्रकार के वाहनों के लिए कम से कम थर्ड पार्टी/तृतीय पक्ष बीमा कराना अनिवार्य होता है

जब आपके वाहन से सड़क पर चलने वाले किसी भी व्यक्ति और वाहन की क्षति होती है तो उसके होने वाले नुकसान की भरपाई इसी वाहन बीमा पॉलिसी के तहत की जाती है

Third Party Insurance/तृतीय पक्ष बीमा में निम्न प्रकार के नुकसान कवर किये जाते हैं

  • जब आपके व्हीकल से सड़क पर चलने वाले किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है
  • किसी थर्ड पार्टी ड्राइवर आदि की मौत हो जाती है
  • जब थर्ड पार्टी को आंशिक / अस्थायी / स्थायी क्षति हो जाती है
  • थर्ड पार्टी के वाहन की क्षति
  • थर्ड पार्टी की कोई अन्य संपत्ति क्षति

Note : लेकिन थर्ड पार्टी बीमा के अंतर्गत फर्स्ट पार्टी यानी व्हीकल ओनर / उसके वाहन या किसी भी अन्य क्षति के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं होती है इसमें सिर्फ थर्ड पार्टी के नुकसान ही कवर किये जाते हैं

# 2. ओन डैमेज बीमा – Own Damage Insurance

जब सिर्फ खुद के व्हीकल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ही बीमा पॉलिसी खरीदी जाती है तो उसे Own Damage Insurance कहा जाता है इसके अंतर्गत बीमा कंपनी आपके वाहन के निम्न प्रकार के नुकसान के लिए जिम्मेदार होती है

  • किसी सड़क दुर्घटना में वाहन का नुकसान
  • किसी प्राकृतिक आपदा या घटना के कारण वाहन को नुकसान
  • आतंकवादी गतिविधियों में वाहन का नुकसान
  • वाहन या उसका कोई सामान आदि चोरी होने का नुकसान
  • आग, भू स्खलन, चट्टानें खिसकने के कारण वाहन का नुकसान
  • आरक्षण दंगे हड़ताल आदि में वाहन का नुकसान
  • डाका / दुर्भावनापूर्ण कृत्य से वाहन का नुकसान
  • वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था कवर

Note : जैसा कि ऊपर बताया है आप अपने वाहन का सिर्फ ओन डैमेज बीमा नहीं करा सकते हैं, इसके साथ आपको थर्ड पार्टी बीमा कराना आवश्यक होता है

# 3. कंप्रिहेंसिव/व्यापक बीमा पॉलिसी – Comprehensive Insurance Policy

जब थर्ड पार्टी बीमा के साथ ओन डैमेज बीमा को भी शामिल कर लिया जाता है, तो इसे कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी यानी Comprehensive Insurance Policy कहा जाता है

कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी में बीमा कंपनी थर्ड पार्टी के साथ साथ आपके वाहन के भी किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए जिम्मेदार होती है

Note : लेकिन बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण IRDA ने ओन डैमेज बीमा लेने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है यानी अब आप डिसाइड कर सकते हैं कि आपको थर्ड पार्टी बीमा के साथ ऑन डैमेज बीमा लेना है या नहीं, आप इसके लिए बाध्य नहीं है लेकिन ध्यान रहे थर्ड पार्टी बीमा कराना तो अनिवार्य है

# 4. व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा – Personal Insurance

व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा वाहन चलाने वाले व्यक्ति ड्राइवर और साथ मे बगल की सीट पर बैठे व्यक्ति और अन्य पैसेंजर आदि के लिए होता है

भारत मे वाहन बीमा के लिए गाड़ी के मालिक ड्राइवर और साथ मे बैठे अन्य व्यक्ति के लिए कम से कम 15 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कराना अनिवार्य है इनमें किसी भी व्यक्ति की मौत होने या फिर आंशिक क्षतिग्रस्त होने पर उसके परिवार वालों को बीमा कंपनी की तरफ से मुआवजा मिलता है

Note : लेकिन 1 जनवरी 2019 से IRDA ने व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा को भी व्हीकल बीमा पॉलिसी से अलग कर दिया है इसलिए वाहन खरीदते समय यदि वाहन मालिक चाहे तो व्हीकल बीमा पॉलिसी के साथ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा ले सकता है और चाहे तो इसे किसी दूसरी बीमा कंपनी से अलग से भी ले सकता है

इसलिए यदि वाहन मालिक ने पहले से ही किसी दूसरी बीमा कंपनी से 15 लाख या इससे ज्यादा का Personal Insurance करा रखा है तो उसे Vehicle Insurance Policy के साथ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा लेने की आवश्यकता नही होती है

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# वाहन के प्रकार के आधार पर वाहन बीमा कितने प्रकार का होता है

व्हीकल के हिसाब से वाहन बीमा के प्रकार इस तरह से हैं

# 1. दोपहिया वाहन बीमा

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि वाहन बीमा के इस प्रकार में दोपहिया वाहन जैसे मोटरसाइकिल, स्कूटर/स्कूटी, मोपेड आदि के बीमा आते हैं

अगर आप कोई भी नया दोपहिया वाहन खरीदते हैं तो कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी सिर्फ एक वर्ष के लिए ले सकते हैं लेकिन थर्ड पार्टी यानी तृतीय पक्ष बीमा कम से कम 5 वर्ष के लिये लेना जरूरी होता है

# 2. व्यक्तिगत/निजी कार बीमा

वाहन बीमा के इस प्रकार में व्यक्तिगत चार पहिया वाहन जैसे कार, स्कोर्पियो, बोलेरो, मारुति सुजुकी, स्विफ्ट आदि के बीमा कवर किये जाते हैं

जब आप नया चार पहिया वाहन खरीदते हैं कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी अपने हिसाब से ले सकते हैं लेकिन थर्ड पार्टी / तृतीय पक्ष बीमा कम से कम 3 वर्ष के लिए लेना जरूरी होता है

# 3. कमर्शियल/व्यापारिक वाहन बीमा

इस तरह के वाहन बीमा के प्रकार में उन वाहनों के बीमा कवर किये जाते हैं जो व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदने के बजाय व्यापारिक इस्तेमाल के लिए खरीदे जाते हैं

कमर्शियल वाहन बीमा मुख्य रूप से व्यापारी लोगों के लिए बनाया गया है जो एक से ज्यादा वाहन खरीदते हैं और उन्हें अपने बिजनेस एवं कारोबार में उपयोग करते हैं वाहन बीमा के इस प्रकार में एक से ज्यादा वाहनों के बीमा एक साथ कवर किये जाते हैं

वाहन बीमा के अपवाद – किन स्थितियों में हुए नुकसान के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं होती हैं

जब आप वाहन का बीमा करा लेते हैं तो वाहन संबंधित सारे नुकसानों का खर्च बीमा कंपनी वहन करती है लेकिन कुछ स्थितियों में होने वाले नुकसान के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नही होती हैं जिन्हें हम वाहन बीमा के अपवाद भी कह सकते हैं ऐसी प्रमुख स्थिति इस प्रकार से हैं

  • जब समय के साथ वाहन की आयु बढ़ती है तो इसके कारण हुए नुकसान जैसे जंग लगना, टूट फूट आदि का कोई क्लेम नहीं मिलता है
  • यदि वाहन गैर कानूनी गतिविधियों के लिए उपयोग किया गया है जैसे शराब, ड्रग्स आदि की सप्लाई तो ऐसी स्थिति में वाहन को होने वाले नुकसान के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नही होती है
  • समय के साथ वाहन के मूल्य में कमी आती है जिससे वाहन की इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) भी कम हो जाती है इसके लिए भी वाहन बीमा कंपनी जिम्मेदार नही होती है
  • वाहन को लगातार उपयोग में लेने के कारण हुए नुकसान जैसे टायर घिस जाना, ट्यूब आदि का फट जाना, बॉडी क़्वालिटी कमजोर होना ऐसे नुकसान के लिये भी बीमा कंपनी जिम्मेदार नही होती है
  • इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल पार्ट्स टूटने को भी बीमा कंपन कवर नहीं करती है
  • युद्ध और परमाणु जोखिम के कारण नुकसान
  • अगर वाहन चालक के पास वैद्य ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो भी बीमा कंपनी किसी प्रकार के नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होती है

एड ऑन कवर – अतिरिक्त बीमा

आमतौर पर वाहन बीमा के साथ कंप्रिहेंसिव कवर मिलता है लेकिन कुछ अतिरिक्त धनराशि का भुगतान करके आप एड ऑन कवर यानी अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं जो प्रमुख रूप से इस प्रकार हैं

1. जीरो डेप्रिसिएशन कवर

जब आपका वाहन नया होता है तो उसकी कीमत ज्यादा होती है लेकिन समय के साथ उसकी कीमत में कमी आती जाती है तो ऐसी स्थिति में जब आपका वाहन पुराना हो जाता है और वह पूरी तरह से टूट फुट जाता है या चोरी हो जाता है तो भी आपको नए वाहन जितनी कीमत बीमा कंपनी की तरफ से मिलती है, लेकिन इसके लिए आपको Zero Depreciation Cover लेना जरूरी होता है इसके लिए आपको बीमा के साथ अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ता है

2. चाबी गुम होने का कवर

अगर किसी कारण से आपसे वाहन की चाबी गुम हो जाती है तो बीमा कंपनी की रिप्लेसमेंट में होने वाले खर्चे का एक हिस्सा आपको प्रदान करती है, इसके लिए आपको Key Replacement Cover लेना होता है जिसके लिए अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होता है

3. इंजन और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट कवर

यदि इलेक्ट्रिक सर्किट या इंजन में किसी खराबी के कारण आपके वाहन में कोई नुकसान हो जाता है तो इस एड ऑन कवर के तहत आप इस खर्चे के लिए क्लेम कर सकते हैं

इसके लिए आपको Engine and Electric Circuit Cover लेना होता है जिसके लिए आपको बीमा के साथ अलग से राशि का भुगतान करना होता है

4. रोड साइड असिस्टेंस कवर

जब यात्रा के समय आपके वाहन में कोई खराबी आ जाती है तो इस एड ऑन कवर के तहत आपको हर संभव सहायता प्रदान कराई जाती है जिसमें फ्यूल वाहन रिपेरिंग आदि शामिल हैं

भारत में वाहन बीमा प्रदान करने वाली प्रमुख बीमा कंपनी

भारत में आज के समय बहुत सारी बीमा कंपनी हैं जो हर प्रकार के वाहन के लिए बीमा सुविधा प्रदान करती हैं आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी बीमा कंपनी से अपने वाहन का बीमा करा सकते हैं कुछ प्रमुख बीमा कंपनी इस प्रकार हैं

दुर्घटना होने पर वाहन बीमा क्लेम कैसे करे

यदि आपने अपने वाहन का बीमा कराया हुआ है और किसी कारण से आपका एक्सीडेंट हो जाता है तो घटना स्थल से डरकर भागना नहीं चाहिए और संभव हो जितना जल्दी अपने वाहन बीमा कंपनी को सूचित करना चाहिए यह का आप टोल फ्री नम्बर पर कॉल करके कर सकते हैं

अब बात आती है एक्सीडेंट का क्लेम कैसे करे तो देखिए यह दो प्रकार का होता है

  1. कैशलेस मोड क्लेम
  2. री -इम्बरश्मेन्ट मोड क्लेम

1. कैशलेस मोड क्लेम प्रोसेस

बीमा क्लेम के इस प्रोसेस में वाहन दुर्घटना ग्रस्त होने पर जब आप बीमा कंपनी को सूचित करते हैं तो उनकी तरफ से एक सर्वेक्षण टीम आती है और वे आपसे घटनास्थल का पूरा ब्यौरा लेते हैं और फिर आपसे आवश्यक डॉक्यूमेंट के साथ बीमा फॉर्म भराते है

यदि बीमा कंपनी से अनुबंधित कोई मोटर गैराज /सर्विस सेंटर पास में है तो आप का वाहन उस गैराज पर ले जाना होता है और वाहन रिपेरिंग में जितना भी खर्च आता है वह सारा खर्च बीमा कंपनी सीधे उस मोटर गैराज को भुगतान कर देती है और आपको अपनी तरफ से कुछ भी भुगतान नहीं करना होता है

2. री इम्बरश्मेन्ट मोड क्लेम प्रोसेस

जब वाहन बीमा कंपनी से अनुबंधित कोई मोटर गैराज/सर्विस सेन्टर पास में उपलब्ध नही होता है तो सर्वेक्षण टीम वाहन नुकसान का जायजा लेती है और अनुमानित लागत निर्धारित करती है

फिर वाहन रिपेरिंग आपको खुद करानी होती है और भुगतान भी खुद से करना होता है आप अपनी मर्जी से किसी भी सर्विस सेंटर पर वाहन रिपेयर कराने के लिए स्वतंत्र होते हैं आपको बस वाहन रिपेरिंग का पक्का बिल लेना होता है जिसका भुगतान बीमा कंपनी आपको बाद में कर देती है

वाहन बीमा के प्रकार संबंधित सवाल जवाब – FAQ’s About Types of Vehicle Insurance

वाहन बीमा के प्रकार – वाहन बीमा कितने प्रकार का होता है से संबंधित पूछे जाने वाले प्रमुख सवाल जवाब इस प्रकार हैं

Q 1 मेरी कार चोरी हो गयी है मैंने इसका थर्ड पार्टी /तृतीय पक्ष बीमा कराया है मुझे बीमा कंपनी कितना क्लेम मिलेगा ?

थर्ड पार्टी /तृतीय पक्ष बीमा में बीमा कंपनी सिर्फ तीसरे पक्ष के नुकसान के लिए जिम्मेदार होती है पॉलिसीधारक पक्ष के लिए वह जिम्मेदार नहीं है इसलिए इस स्थिति में बीमा कंपनी की तरफ से आपको कोई राहत नहीं मिलेगी और ना ही आप कोई क्लेम कर सकते हैं

Q 2 मुझे अपनी कार चोरी/गुम होने का डर है मुझे इसके लिए कोनसा बीमा कराना चाहिए ?

इसके लिए आपको कंप्रिहेंसिव बीमा कराना होगा जिसमें थर्ड पार्टी बीमा भी शामिल होगा क्योंकि किसी भी वाहन के लिए थर्ड पार्टी /तृतीय पक्ष बीमा कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है

Q 3 जब कानूनी रूप से सिर्फ से थर्ड पार्टी/तृतीय पक्ष बीमा कराना ही अनिवार्य है तो मुझे कंप्रिहेंसिव बीमा क्यों कराना चाहिए ?

थर्ड पार्टी बीमा में बीमा कंपनी सिर्फ तीसरे पक्ष के नुकसान की भरपाई करती है यदि आपके वाहन को कुछ हो जाता है तो बीमा कंपनी इस खर्च की भरपाई नहीं करती है इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपके वाहन को भी कुछ नुकसान होने पर इसकी भरपाई बीमा कंपनी करे तो इसके लिए आपको कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी लेनी होती है

Q 4 नो क्लेम बोनस NCB क्या होता है ?

जब आप अपने वाहन की बीमा अवधि में कोई क्लेम नहीं करते हैं और इसे रिनुअल करते हैं तो बीमा कंपनी की तरफ से कुछ छूट यानी डिस्काउंट प्राप्त होता है जिसे NCB नो क्लेम बोनस कहते हैं

Q 5 मेरी कार का बीमा एक्सपायर हो गया है क्या मुझे नो क्लेम बोनस मिलेगा ?

हां, यदि आप बीमा एक्सपायर होने के 90 दिन के भीतर बीमा रिनुअल कराते हैं तो आपको नो क्लेम बोनस मिलता है, बीमा एक्सपायर होने के 90 दिन बाद नो क्लेम बोनस नहीं मिलता है

Conclusion

इस आर्टिकल में वाहन बीमा कितने प्रकार का होता है वाहन बीमा के प्रकार – थर्ड पार्टी/ तृतीय पक्ष बीमा, ओन डैमेज बीमा, कंप्रिहेंसिव बीमा (व्यपाक बीमा पॉलिसी), व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और व्यापारिक/कमर्शियल बीमा के बारे में विस्तार से बताया गया है

अगर अभी भी आपके कुछ सवाल हैं तो बेझिझक कमेंट में पूछ सकते हैं यदि आपको हमारी पोस्ट “वाहन बीमा के प्रकार – थर्ड पार्टी और कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी क्या है | पूरी जानकारी” अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे

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